बिहार के सीतामढ़ी जिले में HIV संक्रमण का भयावह रूप: 7400 से अधिक मरीज, 400 बच्चे प्रभावित
लेखक: India Zee News | 12 दिसंबर 2025
बिहार के सीतामढ़ी जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां HIV संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है। जिले में कुल 7400 से अधिक लोग HIV पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें से करीब 400 बच्चे (18 वर्ष से कम उम्र के) भी शामिल हैं। यह आंकड़ा न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे बिहार के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है। हर महीने 40 से 60 नए केस सामने आ रहे हैं, जिससे ART सेंटर पर मरीजों का बोझ बढ़ता जा रहा है।
प्रमुख आंकड़ों का खुलासा
सीतामढ़ी के ART सेंटर पर वर्तमान में 5000 से अधिक मरीज इलाजरत हैं, जबकि जिले भर में कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 7400 को पार कर चुकी है। पूरे बिहार में एक्टिव HIV मरीजों की संख्या 97,046 तक पहुंच गई है। पटना जिले में ही इस साल 1200 से ज्यादा नए केस दर्ज किए गए हैं। खासकर नाबालिगों में संक्रमण का तेजी से फैलाव चिंता का विषय बन गया है। डॉक्टरों के अनुसार, 400 से अधिक बच्चे इस महामारी की चपेट में हैं, जो सामाजिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टि से गंभीर समस्या दर्शाता है।
HIV फैलाव के पीछे मुख्य कारण
इस महामारी के फैलाव के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण जागरूकता की कमी है। ग्रामीण इलाकों में लोग HIV के लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते और देरी से टेस्टिंग कराते हैं। सामाजिक कलंक के कारण मरीज अपनी स्थिति छिपाते हैं, जिससे संक्रमण और फैलता है। प्रवासी मजदूरों का बाहर रहना और बिना जांच के शादी करना भी प्रमुख वजहें हैं। डॉक्टर हसीन अख्तर, जो ART सेंटर से जुड़ी हैं, ने स्थिति को 'बेहद चिंताजनक' करार दिया है। उनके अनुसार, सेंटर अब हाईलोड केंद्र बन चुका है और संसाधनों की कमी हो रही है।
सीतामढ़ी जैसे जिलों में प्रवासियों की बड़ी संख्या है, जो मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में काम करने जाते हैं। वहां असुरक्षित संबंधों के कारण संक्रमण फैलता है और वे वापस लौटकर परिवार को प्रभावित कर देते हैं। बच्चों में संक्रमण मुख्य रूप से मां से बच्चे में स्थानांतरण (मदर-टू-चाइल्ड ट्रांसमिशन) के कारण हो रहा है। गर्भावस्था के दौरान उचित जांच और दवाओं की कमी इस समस्या को बढ़ावा दे रही है।
स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियां
स्वास्थ्य विभाग के सामने कई चुनौतियां हैं। टेस्टिंग किटों और दवाओं की कमी, प्रशिक्षित स्टाफ की अपर्याप्तता और दूरस्थ गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। ART सेंटर पर मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि एक-एक डॉक्टर को सैकड़ों मरीज संभालने पड़ रहे हैं। इसके अलावा, निगेटिव सोसाइटी का दबाव मरीजों को नियमित इलाज से दूर रखता है। कई मरीज दवा छोड़ देते हैं, जिससे वायरस और प्रतिरोधी हो जाता है।
सरकार के उठाए गए कदम
बिहार सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने गांव-गांव में मुफ्त टेस्टिंग कैंप लगाने का प्लान बनाया है। जागरूकता अभियान तेज कर दिए गए हैं, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं की मदद ली जा रही है। सभी 97,000 एक्टिव मरीजों को मुफ्त ARV दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सीतामढ़ी में विशेष टीम गठित की गई है, जो घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करेगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त फंडिंग और संसाधन मांगे गए हैं। NACO (नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) के दिशानिर्देशों के तहत हॉटलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जहां लोग गोपनीय सलाह ले सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते हस्तक्षेप किया जाए तो संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है।
भविष्य की राह और सुझाव
इस संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए। शादी से पहले अनिवार्य HIV टेस्टिंग को प्रोत्साहित किया जाए। प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष काउंसलिंग सेंटर खोले जाएं। मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जो सही जानकारी प्रसारित कर मिथकों को तोड़े।
सीतामढ़ी का यह मामला पूरे देश के लिए सबक है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह महामारी विकराल रूप धारण कर लेगी। सरकार, समाज और व्यक्तिगत स्तर पर जागरूकता ही एकमात्र हथियार है। HIV को एड्स में बदलने से रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है।
यह रिपोर्ट India Zee News की टीम द्वारा तैयार की गई है। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।
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