सुप्रीम कोर्ट: व्हाट्सएप डेटा शेयरिंग पर रोक India Zee New

सुप्रीम कोर्ट: व्हाट्सएप डेटा शेयरिंग पर रोक - 4 फरवरी 2026

सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप को लगाई कड़ी फटकार: डेटा शेयरिंग से निजता का उल्लंघन, एक भी बाइट शेयर नहीं करने देंगे!

अपडेटेड: 6:38 AM PST | शब्द संख्या: 785

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने व्हाट्सएप और उसकी मूल कंपनी मेटा को निजता के अधिकार के साथ 'खिलवाड़' करने की कड़ी चेतावनी दी है। चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि व्यावसायिक हितों के नाम पर यूजर्स के डेटा को शेयर करने की अनुमति कभी नहीं मिलेगी।

"आप देश के निजता के अधिकार के साथ खेल नहीं सकते। एक भी शब्द या डेटा शेयर करने की इजाजत नहीं मिलेगी," कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा।

यह फैसला 2021 की विवादास्पद प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने मेटा पर 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

पृष्ठभूमि: 2021 पॉलिसी से शुरू हुई जंग

करीब पांच साल पहले, जनवरी 2021 में व्हाट्सएप ने अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी जारी की, जिसमें यूजर्स के चैट हेडर्स, लोकेशन, फोन नंबर और अन्य पर्सनल डेटा को मेटा (तत्कालीन फेसबुक) के अन्य ऐप्स जैसे इंस्टाग्राम और फेसबुक के साथ शेयर करने का प्रावधान था। कंपनी ने दावा किया कि यह 'ऑप्ट-इन' आधार पर होगा, लेकिन यूजर्स को चेतावनी दी गई कि अस्वीकार करने पर ऐप का इस्तेमाल सीमित हो जाएगा।

भारत जैसे बाजार में, जहां 50 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं, यह 'टेक-इट-ऑर-लीव-इट' नीति बनी। इसके खिलाफ कई पिटीशन दायर हुईं। सीसीआई ने इसे डोमिनेंस के दुरुपयोग का मामला माना और जुर्माना ठोका। नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने इसे बरकरार रखा।

कोर्ट की तीखी टिप्पणियां जो कंपनियां हिल गईं

चीफ जस्टिस सूर्या कांत ने व्हाट्सएप की पॉलिसी को 'चालाकी भरी' करार दिया। "यह नीति इतनी जटिल है कि आम आदमी – जैसे घर का नौकर, मजदूर या छोटा व्यापारी – इसे समझ ही नहीं पाएगा। आप लोगों को ऐप की लत लगा देते हैं और फिर मजबूरी का फायदा उठाते हैं," सीजेआई ने कहा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि डेटा का व्यावसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग हो रहा है और लाखों यूजर्स प्रभावित हो चुके हैं। मेटा के वकील अखिल सिबल और मुकुल रोहतगी ने बचाव में कहा कि सीमित डेटा शेयरिंग वैध है और फ्री सर्विस के बदले कमर्शियल यूज जरूरी।

"संविधान के नियम नहीं मान सकते तो देश छोड़ दें। निजता का अधिकार बेचने लायक नहीं।"

प्रभाव: यूजर्स, बिजनेस और ग्लोबल मैसेज

यह फैसला भारत के 53 करोड़ व्हाट्सएप यूजर्स के लिए बड़ी राहत है। अब कंपनी फेसबुक/इंस्टाग्राम के साथ डेटा शेयर नहीं कर पाएगी, जिससे टारगेटेड ऐड्स और प्रोफाइलिंग रुकेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 को मजबूती मिलेगी।

लेकिन मेटा के लिए चुनौती बड़ी है – भारत उनका सबसे बड़ा मार्केट है। कंपनी का बिजनेस मॉडल डेटा पर टिका है, और यह रोक उनके राजस्व को प्रभावित कर सकती है। डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट्स ने स्वागत किया। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के अपूर्वा ने कहा, "यह संविधानिक जीत है। टेक जायंट्स को अब यूजर सेंट्रिक नीतियां बनानी पड़ेंगी।"

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने मेटा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वो यूजर्स को सरल भाषा में सूचित करें और ऑप्ट-आउट का आसान विकल्प दें। अगर अपील खारिज हुई तो 5 साल की डेटा शेयरिंग बैन लागू हो सकता है। सरकार ने भी डेटा लोकलाइजेशन पर जोर दिया है।

फिलहाल, व्हाट्सएप यूजर्स को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य में ऐप अपडेट्स पर नजर रखें। यह मामला दिखाता है कि डिजिटल युग में निजता कोई लग्जरी नहीं, मौलिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया – टेक कंपनियां कितनी भी ताकतवर हों, कानून से ऊपर नहीं।

स्रोत: सुप्रीम कोर्ट कार्यवाही, विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स | संपादकीय: Perplexity News Desk

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